गुस्सा छोड़ो मनाओ दिवाली
चारो तरफ रोशनी-ही रोशनी है,रात जैसे दिन बन गया हो , क्यों ना हो आज दिवाली की रात जो है..
सभी खुश है।
एक तरफ फुलझड़ी चुप-चाप खड़ी है,उसे देखकर अनार पूछता है: फुलझड़ी बहन ! बड़ी गुमशुम खड़ी हो क्या बात है?
फुलझड़ी: अब क्या बताऊ अनार भाई,अब दिवाली में वो मजा नही आता जो पहले आता था।
अनार बड़े उदास स्वर में कहता है : हां तुम ठीक कहती हो,अब लोग हमे कम पसंद करते है,जहा पहले मुझे जला-जला कर लोगो का मन नही भरता था वही अब मुझसे शोर प्रदूषण होता है,कह कर कम इस्तेमाल करने लगे है।
फुलझड़ी ठंडी आह भरते हुए : वही तो,पहले एक बच्चा १००-१०० फुलझड़िया जलाता था,हम फुलझड़ी बहने कितनी खुश होते थे,वही अब लोग हमे रीत करने के लिए ही खरीदते है,कितनी मेरी बहने तो डब्बे से भी बाहर नही आ पाती।
पटाखा: सही कहा तुम लोगो ने,हम लोग ही प्रदूषण फैलाते है,इंसान तो दूध का धुला है जैसे।
तभी गुलाब जामुन भी धीरे-धीरे उनकी बातो में शामिल हो जाता है
गुलाब जामुन: आप सब का दुःख सही है,पर बुरा मत मानना दोस्तों,आप लोगो का दुःख कुछ पुराना हो गया है,आप सब को इन बातो की आदत भी पड गई होगी,पर हम मिठाईयो पर ये कहर तो अभी-अभी बरसा है।
गुलाब जामुन की बात से सहमत बर्फी भी अपना दुःख प्रकट करती है: हममें मिलावट का खोया मिला कर,हमारी दिवाली खराब कर दी। कहा पहले हम हर घर की रौनक बनते थे,बड़ी शान से सजते-धजते थे। वही अब लोग हमे छुने से भी डरने लगे हैं।
इन सबकी बातें सुन कर रस्सगुल्ला कहा पीछे रहने वाला था।
जलेबी की ओर इशारा कर के रस्सगुल्ला बोला: देखो,जलेबी को देखो कितनी खुश है,क्यों ना हो आज उसी का तो बोलबाला है ।
इन सभी की बातें बड़ी देर से एक बुजर्ग दीया सुन रहा था,
दीया खांसते हुए भारी आवाज़ में कहता है : अरे बच्चो,आज ख़ुशी का दिन है,दिवाली है,दिवाली पर दुश्मन भी झगड़ा भूल कर गले मिलते है,और तुम लोग शिकायते कर रहे हो।
अपनी बात समझाते हुए दीया कहता है : अच्छा तुम लोग ही बताओ, तुम लोगो में जो बारूद भरा होता है उससे वातावरण दूषित होता है, हां या ना?
सभी एक स्वर में कहते है: हाँ
दीया: वातावरण दूषित होने से मानव को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है,पेड़-पौधे भी मुरझा जाते है क्या इन सब से तुम खुश होगे?
फिर सब कहते है : नही
मिठाईयो की और इशारा करते हुए दीया फिर कहता है : तुम लोगो को खुश होना चाहिए की मिठाईयो में हुई मिलावट का वक्त रहते पता चल गया,नही तो कितने लोग इन्हें खाकर बीमार पड़ते या शायद जान से हाथ धोना पड़ता। अब तुम बताओ तुम्हारे कारण ये सब होता तुम्हे अच्छा लगता?
सभी मिठाईया एक साथ चिल्ला कर कहती है : नही......
दीया : तो फिर हम सबको खुश होना चाहिए और प्राथना करनी चाहिए कि इस दिवाली सभी के घर खुशी और लक्ष्मी माँ का वास हो ।
सभी दीये की बात को समझते है,और गिले-शिकवे भूल कर गले मिलते हैं और दिवाली की शुभ कामनाये देते हैं।
आप सब भी गिले शिकवे मिटा कर,दुःख भुला कर दिवाली के त्यौहार को आनन्द के साथ मनाये।
"हैप्पी दिवाली" ।