Saturday, December 2, 2017

जन्म देशी-जन्म दिन विदेशी

                        
                                 देशी जन्म-दिन विदेशी (नही समझे 🙄)
                                  जन्म देशी जन्म- दिन विदेशी
जी हां जन्म तो भारत देश में ही होता हैं,लेकिन जन्म वाले दिन को विदेशी ढंग से मनाया जाता हैं। भारत देश विदेशी रंग में ढलता जा रहा हैं। अपनी पहचान खो रहा हैं।बहुत दुःख होता हैं ये सब देख कर। जहा पहले जन्मदिन पर सुबह उठ कर बड़ो का आशीर्वाद लिया जाता था। मन्दिर,गुरुद्वारा जाते थे,गरीबों में कुछ ना कुछ बाटते थे। वहां आज कल के माँ बाप जन्मदिन पर केक कटवा रहे हैं बच्चों से। पार्टिया मना रहे हैं। गाने बजाए जा रहे हैं डांस हो रहा हैं। भारत मॉडर्न हो रहा हैं लेकिन संस्कृति तो मत छोड़ो।फालतू पैसे हैं तो ये सब भी करो साथ में बच्चों को बड़ो का आशीर्वाद दिलवाओ,मन्दिर गुरद्वारे लेकर जाओ,गरीबों की दुआएं दिलवाओ । इससे बच्चों में अच्छे संस्कार आयेंगे। इसका फ़ायदा आपको ही होगा। आजकल येही सुनने को मिलता हैं बच्चें बिगड़ गए हैं। जी नही मेरा मानना ये हैं कि बच्चें नही बिगड़े,उनके माँ बाप ने उन्हें अच्छे संस्कार ही नही दिए। बच्चों को मॉडर्न बनाने में  कोई बुराई नही हैं,आज के कॉम्पीटिशन के युग में बच्चों को सबकुछ सिखाना चाहिए,उन्हें आज के ज़माने में कदम से कदम मिलाकर चलना आना चाहिए लेकिन संस्कृति को भुला कर बिल्कुल नही।


Thursday, July 20, 2017

Tuesday, June 20, 2017

Monday, May 15, 2017

Papa I Love You...

दुनिया की तीखी धुप से मुझको हर पल बचा के रखते थे
मेरे चेहरे की ख़ुशी के लिए जाने क्या क्या कर जाते थे
कहने में देर कर दी पर आज महसूस करती हूँ
मेरे पापा मेरे रब मेरे खुदा थे...
वह जान कर कुछ रौब मुझपर रखते थे
लेकिन बिन कहे मेरी हर चाहत पूरी करते थे
वह मेरी हर ख़ुशी गम से वाकिफ थे
खुल के रो नही पाते मगर सिसकते थे
कहने में देर कर दी पर आज महसूस करती हूँ
मेरे पापा मेरे रब मेरे खुदा थे...
दिन भर पसीना बहा कर देर रात को लौटते थे
हर एक दर्द को चुपचाप खुद पर सहते थे
पुराना सूट पहनते,अपने पर कम खर्चते  थे
पर चीज़े मेरी सब खरीद के लाते थे
कहने में देर कर दी पर आज महसूस करती हूँ
मेरे पापा मेरे रब मेरे खुदा थे...
आधी जिंदगी पापा के साये में पल में बीत गयी
पर पापा के बिना ये सात महीने (11th June to 11th Jan) सालों जैसी खामोशिया भरते हैं
मेरे बिना पापा की हर ख़ुशी अधूरी थी
पापा आपके बिना मेरे हर ख्वाब अधूरे हैं
मेरी जिंदगी की हर ख़ुशी आपसे जुडी थी
कहने में देर कर दी पर आज महसूस करती हूँ
मेरे पापा मेरे रब मेरे खुदा थे...

Tuesday, February 7, 2017

                                   प्यार के बजाय हवस से भरी है युवा पीढ़ी
वैसे तो प्यार क लिए कोई दिन निश्चित  नही होता हैं,लेकिन पश्चमी सभ्यता को देखते हुए हम भारतीय भी उत्सव का कोई मौका हाथ से जाने नही देते हैं,फिर चाहे वो मदर्स डे हो,फाथर डे या वेलनटाइन डे,
                                       वेलनटाइन डे यानि प्यार का दिवस।
वैसे आजकल जिन्दगी इतनी व्यस्त हो गई है कि लोगो के पास अपने प्रियजनों से बात करने की भी फुर्सत नही है। इस बात को नज़र में रखते हुए अगर ये दिवस मनाये जाये तो कोई बुराई नही है। वैसे  भी आजकल दिल की बात को समझना कोई आसन काम नही हैं,इसलिए अगर इन ख़ास दिवस पर आप अपने प्रियजन चाहे वो आपके माता-पिता हो,या जीवनसाथी ,को दिल की बात खुल कर बताओगे,अपना प्यार दिखाओगे तो इससे आपका रिश्ता मजबूत ही बनेगा। सदियों से बड़े बुजुर्ग प्यार की राह पर चलना तो सिखाते ही आ रहे है,लेकिन प्यार का  ख़ास अंदाज़ में,खास दिवस पर इजहार करना आज की युवा पीढ़ी ने सिख लिया है। अब वेलनटाइन डे  भारत वर्ष में भी दिवाली से कम नही मनाया जाता। जिस तरह दिवाली वाले दिन बाजारों में हलचल होती है उसी तरह वेलनटाइन वाले दिन भी बाज़ार  खूब सजे होते है, तरह -तरह के  प्यार के तोहफे,चोकलेट्स ,लव कार्ड्स से दुकानें सजी होती है।और लडके लडकियों से भरी होती है। फरवरी महीने का नाम भी आशिक़ो ने लवली फरवरी रख दिया है।जिस तरह नवरात्रे 9 दिन मनाये जाते है, उसी तरह "वैलेंटाइन डे"की तैयारी भी 7 फरवरी से शुरू हो जाती है|
 7thफरवरी  रोंज डे (rose day)
8thफरवरी प्रपोज डे  (propose day)
9thफरवरी चोकलेट डे (chocolate day)
10thफरवरी टेडी day (teddy day)
11thफरवरी परोमिस  डे (promise day)
12th फरवरी हग डे (hug day )
13thफरवरी किस डे (kiss day)
14th फरवरी वैलेंटाइन डे (VALENTINE'S DAY)

प्यार में कोई बुराई नही है,बस मन सच्चा होना चाहिए,जो आजकल के युवाओ में बहुत कम देखने को मिलता है।आजकल की युवा पीढ़ी प्यार के सही मायने नही समझ पा रही है,उनके दिमाग में हवस भरी पड़ी है,वे प्यार को खिलौने की तरह इस्तेमाल करते है और फिर एक को छोड़ दूसरे के साथ हो जाते है,ऐसे लोग प्यार की पवित्रता को ठेस पहुँचा रहे है।और कहते है ना घुन के साथ घेहू भी पिस्सा जाता है,उसी  तरह हवस के पुजारियों के साथ सच्चे प्यार करने वाले भी शक की निगाह से देखे जाते है। और सच बात तो ये हैं कि आज की युवा पीढ़ी प्यार करना तो जानती है,लेकिन उनमें वह सहनशक्ति ,वह विश्वास नही है जो प्यार के रिश्ते को निभाने में एहम भूमिका निभाता है। प्यार का रिश्ता विश्वास,त्याग,सहनशक्ति की नीव पर खड़ा होता है। लेकिन आजकल की युवा पीढ़ी अपनी शर्तो पर प्यार हासिल करना चाहती है। जितनी जल्दी प्यार के रिश्ते में बंधते है,उतनी ही जल्दी प्यार के रिश्ते से आज़ाद भी होना चाहते है। हमारा समाज बहुत गलत दिशा में जा रहा हैं, युवा पीढ़ी में अच्छे संस्कार डालना उनके माता-पिता,अध्यापक आदि का फ़र्ज़ हैं। हम सब को अपना फ़र्ज़ निभाना चाहिए,तभी हमारा समाज अच्छी सोच अच्छे संस्कारों से भरपूर होगा। चाहे लड़का हो या लड़की दोनों में संस्कार होने बहुत जरूरी हैं। हमें अपने बच्चों को प्यार के सही मायने सिखाने चाहिए। उन्हें हवस और प्यार का अंतर पता होना चाहिए। युवा पीढ़ी को प्यार का सही अर्थ पता होना चाहिए। जो प्यार पहली नज़र में हो जाए वो प्यार नही आकर्षण होता हैं, उसमें सामने वाले को हासिल करने की जल्दी होती और हासिल होने के बाद छोड़ने की भी जल्दी होती हैं। ऐसा प्यार,प्यार नही होता। हमें बच्चों को समझाना चाहिए कि प्यार किसी को हासिल करने का नाम नही हैं,सच्चा प्यार वो होता हैं जिसमें एक दूसरे की कद्र की जाती हैं,एक दूसरे पर दिल से भरोसा किया जाता हैं। सच्चे प्यार में कोई जल्दबाजी नही होती। सच्चा प्यार कभी खत्म नही होता क्योंकि सच्चा प्यारा एक दूसरे को जानने और समझने के बाद होता हैं। इसलिए अंत में इतना ही कहूँगी प्यार का दिन मनाये पर प्यार के साथ।
              HAPPY VALENTINE'S DAY🌹


Sunday, February 5, 2017

प्यार के बजाय हवस से भरी है युवा पीढ़ी 
वैसे तो प्यार क लिए कोई दिन निश्चित  नही होता हैं,लेकिन पश्चमी सभ्यता को देखते हुए हम भारतीय भी उत्सव का कोई मौका हाथ से जाने नही देते हैं,फिर चाहे वो मदर्स डे हो,फाथर डे या वेलनटाइन डे, 
वेलनटाइन डे यानि प्यार का दिवस।
वैसे आजकल जिन्दगी इतनी व्यस्त हो गई है की लोगो के पास अपने प्रियजनों से बात करने की भी फुर्सत नही है। इस बात को नज़र में रखते हुए अगर ये दिवस मनाये जाये तो कोई बुराई नही है। वैसे  भी आजकल दिल की बात को समझना कोई आसन काम नही हैं,इसलिए अगर इन ख़ास दिवस पर आप अपने प्रियजन चाहे वो आपके माता-पिता हो,या जीवनसाथी ,को दिल की बात खुल कर बताओगे,अपना प्यार दिखाओगे तो इससे आपका रिश्ता मजबूत ही बनेगा। सदियों से बड़े बुजुर्ग प्यार की राह पर चलना तो सिखाते ही आ रहे है,लेकिन प्यार का  ख़ास अंदाज़ में,खास दिवस पर इजहार करना आज की युवा पीढ़ी ने सिख लिया है। अब वेलनटाइन डे  भारत वर्ष में भी दिवाली से कम नही मनाया जाता। जिस तरह दिवाली वाले दिन बाजारों में हलचल होती है उसी तरह वेलनटाइन वाले दिन भी बाज़ार  खूब सजे होते है, तरह -तरह के  प्यार के तोहफे,चोकलेट्स ,लव कार्ड्स से दुकानें सजी होती है।और लडके लडकियों से भरी होती है। फरवरी महीने का नाम भी आशिक़ो ने लवली फरवरी रख दिया है।जिस तरह नवरात्रे 9 दिन मनाये जाते है, उसी तरह "वैलेंटाइन डे"की तैयारी भी 7 फरवरी से शुरू हो जाती है|
 7thफरवरी  रोंज डे (rose day)
8thफरवरी प्रपोज डे  (propose day)
9thफरवरी चोकलेट डे (chocolate day)
10thफरवरी टेडी day (teddy day)
11thफरवरी परोमिस  डे (promise day)
12th फरवरी हग डे (hug day )
13thफरवरी किस डे (kiss day)
14th फरवरी वैलेंटाइन डे (VALENTINE'S DAY)
प्यार में कोई बुराई नही है,बस मन सच्चा होना चाहिए,जो आजकल के युवाओ में बहुत कम देखने को मिलता है।आजकल की युवा पीढ़ी प्यार के सही मायने नही समझ पा रही है,उनके दिमाग में हवस भरी पड़ी है,वे प्यार को खिलौने की तरह इस्तेमाल करते है और फिर एक को छोड़ दूसरे के साथ हो जाते है,ऐसे लोग प्यार की पवित्रता को ठेस पहुँचा रहे है।और कहते है ना घुन के साथ घेहू भी पिस्सा जाता है,उसी  तरह हवस के पुजारियों के साथ सच्चे प्यार करने वाले भी शक की निगाह से देखे जाते है। और सच बात तो ये हैं कि आज की युवा पीढ़ी प्यार करना तो जानती है,लेकिन उनमें वह सहनशक्ति ,वह विश्वास नही है जो प्यार के रिश्ते को निभाने में एहम भूमिका निभाता है। प्यार का रिश्ता विश्वास,त्याग,सहनशक्ति की नीव पर खड़ा होता है। लेकिन आजकल की युवा पीढ़ी अपनी शर्तो पर प्यार हासिल करना चाहती है। जितनी जल्दी प्यार के रिश्ते में बंधते है,उतनी ही जल्दी प्यार के रिश्ते से आज़ाद भी होना चाहते है। हमारा समाज बहुत गलत दिशा में जा रहा हैं, युवा पीढ़ी में अच्छे संस्कार डालना उनके माता-पिता,अध्यापक आदि का फ़र्ज़ हैं। हम सब को अपना फ़र्ज़ निभाना चाहिए,तभी हमारा समाज अच्छी सोच अच्छे संस्कारों से भरपूर होगा। चाहे लड़का हो या लड़की दोनों में संस्कार होने बहुत जरूरी हैं। हमें अपने बच्चों को प्यार के सही मायने सिखाने चाहिए। उन्हें हवस और प्यार का अंतर पता होना चाहिए। युवा पीढ़ी को प्यार का सही अर्थ पता होना चाहिए। जो प्यार पहली नज़र में हो जाए वो प्यार नही आकर्षण होता हैं, उसमें सामने वाले को हासिल करने की जल्दी होती और हासिल होने के बाद छोड़ने की भी जल्दी होती हैं। ऐसा प्यार,प्यार नही होता। हमें बच्चों को समझाना चाहिए कि प्यार किसी को हासिल करने का नाम नही हैं,सच्चा प्यार वो होता हैं जिसमें एक दूसरे की कद्र की जाती हैं,एक दूसरे पर दिल से भरोसा किया जाता हैं। सच्चे प्यार में कोई जल्दबाजी नही होती। सच्चा प्यार कभी खत्म नही होता क्योंकि सच्चा प्यारा एक दूसरे को जानने और समझने के बाद होता हैं। इसलिए अंत में इतना ही कहूँगी प्यार का दिन मनाये पर प्यार के साथ

Saturday, November 12, 2016

                 गुरुपर्व की हार्दिक बधाईया
सिख धर्म के पहले गुरु व् संस्थापक गुरु नानक देव जी  के जन्म दिन की वर्षगाठ  पुरे देश में बड़े उत्साह और भाव से हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को  मनाई जाती है, इस साल ये दिवस 14 नवम्बर सोमवार  को पुरे देश में बड़ी धूम धाम से मनाया जा रहा है, गुरुपर्व को गुरु नानक जयंती भी कहा जाता है  गुरु नानक जी का जन्म सन १४६९ को तलवंडी
(जो अब लाहोर पाकिस्तान में स्थित है और ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है ) में हुआ था,वहा अब एक बहुत खुबसूरत गुरुद्वारा व सरोवर है,इस पावन उत्सव में भारत व विदेश से लाखो संगत माथा  टेकने व इस्नान करने पहुँचती  है ,गुरुपर्व  को यहा बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है,  इस दिन से कुछ दिन पूर्व पुरे देश में जगह-जगह प्रभात फेरीया निकाली जाती है  ,लाखो की संख्या में
संगत बड़े श्रधा व भाव से शब्द गाते हुए  और पुरे नगर का चक्कर लगाते हुए गुरूद्वारे पहुचती है, गुरु ग्रन्थ साहिबजी को पालकी में विराजमान करवाकर पञ्च प्यारो सहित नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है,जगह- जगह
पंडाल लगाये जाते है और प्रसाद बांटा जाता है,गुरु ग्रन्थ साहिब (सिखों की धार्मिक पुस्तक ) का पाठ(अखंड पाठ ) किया जाता है,गुरु नानक देव जी  ने कभी उच्च नीच का भेद भाव नही किया, उन्होंने येही सिखाया की
सभी प्राणी भगवान के बन्दे है , धर्म के नाम पर भेद भाव करना व्यर्थ है, इसलिए गुरु नानक जयंती पर बहुत बड़े लंगर का आयोजन होता है जहा सभी लोग हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,राजा,रंक एक ही पंक्ति में बैठ कर लंगर छकते (खाते)है ,अमृतसर गुरूद्वारे में गुरुपर्व का अलग ही नजारा होता है,इस दिन लोग रात को मोमबती व दीयो से गुरूद्वारे व
अपने घरो में प्रकाश करते है  "मिटया अँधेरा जग चानन होया" गुरु नानक देव जी ने कहा है की परिवार
का त्याग करके सन्यासी बनने से प्रभु की बंदगी नही की जाती,अगर प्रभु को पाना
हैं तो मन पवित्र,सहानुभूति,धैर्य , ईमानदारी होनी चाहिए,गुरु नानक जी ने
कहा है कि अगर कोई सच्चे दिल से पाठ करके अरदास करता  है तो वाहेगुरु खुद आकर उसके सभी काम सवारते है 
"संता दे कारज आप खलोया सब कम करावन आया राम"
जन्मदिन पर उपहार दिया जाता है, लेकिन वाहेगुरु के दरबार में सच्चे मन जो मांगो मिलता हैं ,इस गुरुपर्व पर वाहेगुरु
के आगे ये अरदास है कि अपने सभी भगतों की अच्छी  मनोकामना पूरी करे ,उन्हें तंदरुस्ती व सदबुधि दे ।
                                                वाहेगुरु जी का खालसा
                                                  वाहेगुरु जी की फत्ते।। 

Saturday, November 5, 2016

                गुस्सा छोड़ो मनाओ दिवाली 

चारो तरफ रोशनी-ही रोशनी है,रात जैसे दिन बन गया हो , क्यों ना हो आज दिवाली की रात जो है..
सभी खुश है।
एक तरफ फुलझड़ी चुप-चाप खड़ी है,उसे देखकर अनार पूछता है: फुलझड़ी बहन ! बड़ी गुमशुम  खड़ी हो क्या बात है?
फुलझड़ी: अब क्या बताऊ अनार भाई,अब दिवाली में वो मजा नही आता जो पहले आता था।
अनार बड़े उदास स्वर में कहता है  : हां तुम ठीक कहती हो,अब लोग हमे कम पसंद करते है,जहा पहले मुझे जला-जला कर लोगो का मन नही भरता था वही अब मुझसे शोर प्रदूषण होता है,कह कर कम इस्तेमाल करने लगे है।
फुलझड़ी ठंडी आह भरते हुए : वही तो,पहले एक बच्चा १००-१०० फुलझड़िया जलाता था,हम फुलझड़ी बहने कितनी खुश होते थे,वही अब लोग हमे रीत करने के लिए ही खरीदते है,कितनी  मेरी बहने तो डब्बे से भी बाहर नही आ पाती।
पटाखा: सही कहा तुम लोगो ने,हम लोग ही प्रदूषण फैलाते है,इंसान तो  दूध का धुला है जैसे।
तभी गुलाब जामुन भी धीरे-धीरे उनकी बातो में शामिल हो जाता है 
गुलाब जामुन: आप सब का दुःख सही है,पर बुरा मत मानना दोस्तों,आप लोगो का दुःख कुछ पुराना हो गया है,आप सब को इन बातो की  आदत  भी पड गई होगी,पर हम मिठाईयो पर ये कहर तो अभी-अभी बरसा है।
गुलाब जामुन की बात से सहमत बर्फी भी अपना दुःख प्रकट करती है: हममें मिलावट का खोया मिला कर,हमारी दिवाली खराब कर दी। कहा पहले हम हर घर की रौनक बनते थे,बड़ी शान से सजते-धजते थे। वही अब लोग हमे छुने से भी डरने लगे हैं।
इन सबकी  बातें सुन कर रस्सगुल्ला  कहा पीछे रहने वाला था।
जलेबी की ओर इशारा कर के रस्सगुल्ला  बोला: देखो,जलेबी को देखो कितनी खुश है,क्यों ना हो आज उसी का तो बोलबाला है ।
इन सभी  की बातें बड़ी देर से एक बुजर्ग दीया सुन रहा था,
दीया खांसते हुए भारी आवाज़ में कहता है : अरे बच्चो,आज ख़ुशी का दिन है,दिवाली है,दिवाली पर दुश्मन भी झगड़ा भूल कर गले मिलते है,और तुम लोग शिकायते कर रहे हो।
अपनी बात समझाते हुए दीया कहता है : अच्छा तुम लोग ही बताओ, तुम लोगो में जो बारूद भरा होता है उससे वातावरण दूषित होता है, हां या ना?
सभी एक स्वर में कहते है: हाँ
दीया: वातावरण दूषित होने से मानव को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है,पेड़-पौधे भी मुरझा जाते है क्या इन सब से तुम खुश होगे?
फिर सब कहते है : नही
मिठाईयो की और इशारा करते हुए दीया फिर कहता है : तुम लोगो को खुश होना चाहिए की मिठाईयो में हुई मिलावट का वक्त रहते पता  चल गया,नही तो कितने लोग इन्हें खाकर बीमार पड़ते या शायद जान से हाथ धोना पड़ता। अब तुम बताओ तुम्हारे कारण ये सब होता तुम्हे अच्छा लगता?
सभी मिठाईया एक साथ चिल्ला कर कहती है : नही......
दीया : तो फिर हम सबको खुश होना चाहिए और प्राथना करनी चाहिए कि इस दिवाली सभी के घर खुशी और लक्ष्मी माँ का वास हो ।
सभी दीये की बात को समझते है,और गिले-शिकवे भूल कर गले मिलते हैं और दिवाली की शुभ कामनाये देते हैं।
आप सब भी गिले शिकवे मिटा कर,दुःख भुला कर दिवाली के त्यौहार को आनन्द के साथ मनाये।
"हैप्पी दिवाली" ।

Tuesday, September 27, 2016

                               दवाईयों के प्रयोग से करे परहेज
(यह लेख साधारण व आम बीमारियों
पर लिखा गया है)

आज की भाग दौड़ की जिंदगी में हम लोग सिर्फ पैसा कमाने में लगे है,हम लोग ये भूल गये है की जिस पैसे के लिए हम
लोग दिन रात अपने शरीर से मेहनत करवा रहे है,कल जब वो पैसा हमारे पास होगा पर हमारा शरीर हमारा साथ
नही देगा,तो जो पैसा आज हम दिन रात मेहनत कर के कमा रहे हैं वो पैसा हमें डॉक्टर को देना पड़ेगा अपने शरीर का इलाज़ करवाने के लिए। आज हम लोग दवाईयों पर बहुत  निर्भर रहते है,सिर दर्द,बुखार,खांसी जुकाम या कोई भी छोटी बीमारी हो बिना समय गवाए
झट दवाई खा लेते है।अरे भई! हम समय बर्बाद नही कर सकते,बहुत  काम है हमें। ठीक है समय मत बर्बाद करे,चाहे
दवाईया खाने से शरीर खराब हो जाये,उसकी परवाह नही है।आज लोग नेट पर,पाटियो,और बेकार की गप्पों में समय
नष्ट  कर  देगे,लेकिन अगर उन्हें व्ययाम, योग या घरेलू दवाईयों  का प्रयोग करने के लिए कहा  जाये तो उनके पास समय
नही होता,जैसे ये करने से कहने वाले को फायदा होगा उनके शरीर को नही। जैसा की कहा जाता है स्वस्थ तन में स्वस्थ मन निवास करता है,अगर तन ही स्वस्थ नही होगा तो मन स्वस्थ कैसे होगा,और अगर मन स्वस्थ नही होगा तो इसका असर हमारे काम पर भी पड़ेगा। क्या
हमने कभी सोचा है कि जिन बीमारियों का नाम कभी-कभी  सुना जाता थाआज वो आम बीमारियों की  सूचि में
आ गई है जैसे उच्च व निम्न रक्तचाप, सिने में जलन,मधुमेह आदि। ऐसा क्यों ??
 इन सब का कारण है हम लोगो की  बिगड़ी हुई दिनचर्या। सोने के समय जागते है,जागने के समय सोते है। पानी की जगह तरह तरह के पेय जल से प्यास बुझाते है, दाल रोटी की जगह पिज्जा,बर्गर आदि ने ले ली है।
अब अगर सुबह की ताज़ी हवा  का स्थान AC और कूलर  की हवा ले ले तो
शरीर कैसे स्वस्थ रह सकता है। लोग व्यायाम के नाम पर जिम,हेल्थ क्लब आदि जाते है जहा मशीनों से सेहत
बनाने की बात करते है,अब आप ही सोचे सुबह की स्वच्छ,ताज़ी हवा  से शरीर को पर्याप्त मात्रा में ओक्सिजन मिलेगी या चार दिवारी में बने जिम और हेल्थ क्लब में । अगर हम अपने व्यस्त जीवन में,रोंज की दिन चर्या में कुछ छोटी-छोटी बातें शामिल कर ले तो हम एक स्वस्थ
जीवन का आनंद उठा सकते है। सबसे पहले तो हमे दवाईयों का कम से कम उपयोग करना चाहिए ,हमारी पहलीकोशिश येही रहनी चाहिए की हम दवाईयों की जगह कोई घरेलू  नुस्खे  का प्रयोग करे। दिखने  में बहुत ही साधारण 
नुस्खे बहुत ही फायेदेमंद  है,रसोई में प्रयोग होने वाली चीज़े रोगों का निवारण करने में सहायक सिद्ध हुई है| जैसे उलटी आने
पर दवाई खाने की बजाये प्याज़ के रस का सेवन तुरंत फायेदेमंद  है ,कान दर्द होने पर लहसन को सरसों के तेल में जलाकर,तेल को छान कर इसकी एक दो बुँदे कान में डाले कान दर्द गायब।
दवाईया एक रोग ठीक कर के अन्य रोग लगा देती है,इसीलिए स्वस्थ जीवन की चाह रखने वालो को दवाईयों को इनकार
करना सीख लेना चाहिए।

Wednesday, July 13, 2016

मौत

कांटो से भरी राहें थी
दिल में ख्वाहिशे थी
रो रहे थे हंस रहे थे
शुक्रीया रब्बा तेरा कर रहे थे
पर तूने रबा ये क्या कर दिया
मौत से रूबरू कर दिया
पल में मेरी हस्ती मिट गयी
ज़िन्दगी की धज्जिया उड़ गयी
दुःख के बाद सुख हैं ऐसा विश्वास था
ऐ रब्बा ये कैसा तेरा इन्साफ था
कहते मेरे कर्मो का फल था
लेकिन मैं तेरा, हाँ रब्बा तेरा भक्त था
तेरी मर्ज़ी के बिना पत्ता नही हिलता
मेरे कर्मो का लिखना भी तो तेरे हाथ था
ज़िन्दगी कभी आसान ना थी
होंठो पे शिकायत भी ना थी
हर हाल में तेरा गुणगान था
क्या मौत तेरी भक्ति का प्रसाद था...