ममता की छाव
अंडा फूटा, बच्चा निकला
खुसर-पुसर पंख नही हैं
पक्षी ने कान बन्द कर दिए बच्चे के
बच्चा कुछ सुन ना पाया
खोंसला बहुत सुंदर बनाया
हर आराम दिलाया
पक्षी अपने पंखों पर उड़ाता आसमान की सैर कराता बच्चे को
सब को उड़ते देखता फिर भी पक्षी के पंखों को अपने पंख समझता आनन्द लेता कुछ समझ ना पाया।
वक़्त बीतता गया सब ठीक चलता गया

अचानक एक दिन शिकारी की नज़र पड़ी पक्षी पर,पक्षी के प्राण पखेरू हो गए
बच्चा खोंसले में ही रह गया
अब बातें समझ आरही थी
अब ढोकरो की आहट सुनाई दे रही थी क्योंकि अब कान बन्द करने वाला जन्मदाता नही रहा था।
अंडा फूटा, बच्चा निकला
खुसर-पुसर पंख नही हैं
पक्षी ने कान बन्द कर दिए बच्चे के
बच्चा कुछ सुन ना पाया
खोंसला बहुत सुंदर बनाया
हर आराम दिलाया
पक्षी अपने पंखों पर उड़ाता आसमान की सैर कराता बच्चे को
सब को उड़ते देखता फिर भी पक्षी के पंखों को अपने पंख समझता आनन्द लेता कुछ समझ ना पाया।
वक़्त बीतता गया सब ठीक चलता गया

अचानक एक दिन शिकारी की नज़र पड़ी पक्षी पर,पक्षी के प्राण पखेरू हो गए
बच्चा खोंसले में ही रह गया
अब बातें समझ आरही थी
अब ढोकरो की आहट सुनाई दे रही थी क्योंकि अब कान बन्द करने वाला जन्मदाता नही रहा था।
