Saturday, November 12, 2016

                 गुरुपर्व की हार्दिक बधाईया
सिख धर्म के पहले गुरु व् संस्थापक गुरु नानक देव जी  के जन्म दिन की वर्षगाठ  पुरे देश में बड़े उत्साह और भाव से हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को  मनाई जाती है, इस साल ये दिवस 14 नवम्बर सोमवार  को पुरे देश में बड़ी धूम धाम से मनाया जा रहा है, गुरुपर्व को गुरु नानक जयंती भी कहा जाता है  गुरु नानक जी का जन्म सन १४६९ को तलवंडी
(जो अब लाहोर पाकिस्तान में स्थित है और ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है ) में हुआ था,वहा अब एक बहुत खुबसूरत गुरुद्वारा व सरोवर है,इस पावन उत्सव में भारत व विदेश से लाखो संगत माथा  टेकने व इस्नान करने पहुँचती  है ,गुरुपर्व  को यहा बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है,  इस दिन से कुछ दिन पूर्व पुरे देश में जगह-जगह प्रभात फेरीया निकाली जाती है  ,लाखो की संख्या में
संगत बड़े श्रधा व भाव से शब्द गाते हुए  और पुरे नगर का चक्कर लगाते हुए गुरूद्वारे पहुचती है, गुरु ग्रन्थ साहिबजी को पालकी में विराजमान करवाकर पञ्च प्यारो सहित नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है,जगह- जगह
पंडाल लगाये जाते है और प्रसाद बांटा जाता है,गुरु ग्रन्थ साहिब (सिखों की धार्मिक पुस्तक ) का पाठ(अखंड पाठ ) किया जाता है,गुरु नानक देव जी  ने कभी उच्च नीच का भेद भाव नही किया, उन्होंने येही सिखाया की
सभी प्राणी भगवान के बन्दे है , धर्म के नाम पर भेद भाव करना व्यर्थ है, इसलिए गुरु नानक जयंती पर बहुत बड़े लंगर का आयोजन होता है जहा सभी लोग हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,राजा,रंक एक ही पंक्ति में बैठ कर लंगर छकते (खाते)है ,अमृतसर गुरूद्वारे में गुरुपर्व का अलग ही नजारा होता है,इस दिन लोग रात को मोमबती व दीयो से गुरूद्वारे व
अपने घरो में प्रकाश करते है  "मिटया अँधेरा जग चानन होया" गुरु नानक देव जी ने कहा है की परिवार
का त्याग करके सन्यासी बनने से प्रभु की बंदगी नही की जाती,अगर प्रभु को पाना
हैं तो मन पवित्र,सहानुभूति,धैर्य , ईमानदारी होनी चाहिए,गुरु नानक जी ने
कहा है कि अगर कोई सच्चे दिल से पाठ करके अरदास करता  है तो वाहेगुरु खुद आकर उसके सभी काम सवारते है 
"संता दे कारज आप खलोया सब कम करावन आया राम"
जन्मदिन पर उपहार दिया जाता है, लेकिन वाहेगुरु के दरबार में सच्चे मन जो मांगो मिलता हैं ,इस गुरुपर्व पर वाहेगुरु
के आगे ये अरदास है कि अपने सभी भगतों की अच्छी  मनोकामना पूरी करे ,उन्हें तंदरुस्ती व सदबुधि दे ।
                                                वाहेगुरु जी का खालसा
                                                  वाहेगुरु जी की फत्ते।। 

Saturday, November 5, 2016

                गुस्सा छोड़ो मनाओ दिवाली 

चारो तरफ रोशनी-ही रोशनी है,रात जैसे दिन बन गया हो , क्यों ना हो आज दिवाली की रात जो है..
सभी खुश है।
एक तरफ फुलझड़ी चुप-चाप खड़ी है,उसे देखकर अनार पूछता है: फुलझड़ी बहन ! बड़ी गुमशुम  खड़ी हो क्या बात है?
फुलझड़ी: अब क्या बताऊ अनार भाई,अब दिवाली में वो मजा नही आता जो पहले आता था।
अनार बड़े उदास स्वर में कहता है  : हां तुम ठीक कहती हो,अब लोग हमे कम पसंद करते है,जहा पहले मुझे जला-जला कर लोगो का मन नही भरता था वही अब मुझसे शोर प्रदूषण होता है,कह कर कम इस्तेमाल करने लगे है।
फुलझड़ी ठंडी आह भरते हुए : वही तो,पहले एक बच्चा १००-१०० फुलझड़िया जलाता था,हम फुलझड़ी बहने कितनी खुश होते थे,वही अब लोग हमे रीत करने के लिए ही खरीदते है,कितनी  मेरी बहने तो डब्बे से भी बाहर नही आ पाती।
पटाखा: सही कहा तुम लोगो ने,हम लोग ही प्रदूषण फैलाते है,इंसान तो  दूध का धुला है जैसे।
तभी गुलाब जामुन भी धीरे-धीरे उनकी बातो में शामिल हो जाता है 
गुलाब जामुन: आप सब का दुःख सही है,पर बुरा मत मानना दोस्तों,आप लोगो का दुःख कुछ पुराना हो गया है,आप सब को इन बातो की  आदत  भी पड गई होगी,पर हम मिठाईयो पर ये कहर तो अभी-अभी बरसा है।
गुलाब जामुन की बात से सहमत बर्फी भी अपना दुःख प्रकट करती है: हममें मिलावट का खोया मिला कर,हमारी दिवाली खराब कर दी। कहा पहले हम हर घर की रौनक बनते थे,बड़ी शान से सजते-धजते थे। वही अब लोग हमे छुने से भी डरने लगे हैं।
इन सबकी  बातें सुन कर रस्सगुल्ला  कहा पीछे रहने वाला था।
जलेबी की ओर इशारा कर के रस्सगुल्ला  बोला: देखो,जलेबी को देखो कितनी खुश है,क्यों ना हो आज उसी का तो बोलबाला है ।
इन सभी  की बातें बड़ी देर से एक बुजर्ग दीया सुन रहा था,
दीया खांसते हुए भारी आवाज़ में कहता है : अरे बच्चो,आज ख़ुशी का दिन है,दिवाली है,दिवाली पर दुश्मन भी झगड़ा भूल कर गले मिलते है,और तुम लोग शिकायते कर रहे हो।
अपनी बात समझाते हुए दीया कहता है : अच्छा तुम लोग ही बताओ, तुम लोगो में जो बारूद भरा होता है उससे वातावरण दूषित होता है, हां या ना?
सभी एक स्वर में कहते है: हाँ
दीया: वातावरण दूषित होने से मानव को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है,पेड़-पौधे भी मुरझा जाते है क्या इन सब से तुम खुश होगे?
फिर सब कहते है : नही
मिठाईयो की और इशारा करते हुए दीया फिर कहता है : तुम लोगो को खुश होना चाहिए की मिठाईयो में हुई मिलावट का वक्त रहते पता  चल गया,नही तो कितने लोग इन्हें खाकर बीमार पड़ते या शायद जान से हाथ धोना पड़ता। अब तुम बताओ तुम्हारे कारण ये सब होता तुम्हे अच्छा लगता?
सभी मिठाईया एक साथ चिल्ला कर कहती है : नही......
दीया : तो फिर हम सबको खुश होना चाहिए और प्राथना करनी चाहिए कि इस दिवाली सभी के घर खुशी और लक्ष्मी माँ का वास हो ।
सभी दीये की बात को समझते है,और गिले-शिकवे भूल कर गले मिलते हैं और दिवाली की शुभ कामनाये देते हैं।
आप सब भी गिले शिकवे मिटा कर,दुःख भुला कर दिवाली के त्यौहार को आनन्द के साथ मनाये।
"हैप्पी दिवाली" ।