सिख धर्म के पहले गुरु व् संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्म दिन की वर्षगाठ पुरे देश में बड़े उत्साह और भाव से हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, इस साल ये दिवस 14 नवम्बर सोमवार को पुरे देश में बड़ी धूम धाम से मनाया जा रहा है, गुरुपर्व को गुरु नानक जयंती भी कहा जाता है गुरु नानक जी का जन्म सन १४६९ को तलवंडी
(जो अब लाहोर पाकिस्तान में स्थित है और ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है ) में हुआ था,वहा अब एक बहुत खुबसूरत गुरुद्वारा व सरोवर है,इस पावन उत्सव में भारत व विदेश से लाखो संगत माथा टेकने व इस्नान करने पहुँचती है ,गुरुपर्व को यहा बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है, इस दिन से कुछ दिन पूर्व पुरे देश में जगह-जगह प्रभात फेरीया निकाली जाती है ,लाखो की संख्या में
संगत बड़े श्रधा व भाव से शब्द गाते हुए और पुरे नगर का चक्कर लगाते हुए गुरूद्वारे पहुचती है, गुरु ग्रन्थ साहिबजी को पालकी में विराजमान करवाकर पञ्च प्यारो सहित नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है,जगह- जगह
पंडाल लगाये जाते है और प्रसाद बांटा जाता है,गुरु ग्रन्थ साहिब (सिखों की धार्मिक पुस्तक ) का पाठ(अखंड पाठ ) किया जाता है,गुरु नानक देव जी ने कभी उच्च नीच का भेद भाव नही किया, उन्होंने येही सिखाया की
सभी प्राणी भगवान के बन्दे है , धर्म के नाम पर भेद भाव करना व्यर्थ है, इसलिए गुरु नानक जयंती पर बहुत बड़े लंगर का आयोजन होता है जहा सभी लोग हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,राजा,
अपने घरो में प्रकाश करते है "मिटया अँधेरा जग चानन होया" गुरु नानक देव जी ने कहा है की परिवार
का त्याग करके सन्यासी बनने से प्रभु की बंदगी नही की जाती,अगर प्रभु को पाना
हैं तो मन पवित्र,सहानुभूति,धैर्य , ईमानदारी होनी चाहिए,गुरु नानक जी ने
कहा है कि अगर कोई सच्चे दिल से पाठ करके अरदास करता है तो वाहेगुरु खुद आकर उसके सभी काम सवारते है
"संता दे कारज आप खलोया सब कम करावन आया राम"
जन्मदिन पर उपहार दिया जाता है, लेकिन वाहेगुरु के दरबार में सच्चे मन जो मांगो मिलता हैं ,इस गुरुपर्व पर वाहेगुरु
के आगे ये अरदास है कि अपने सभी भगतों की अच्छी मनोकामना पूरी करे ,उन्हें तंदरुस्ती व सदबुधि दे ।
वाहेगुरु जी का खालसा
वाहेगुरु जी की फत्ते।।