जीवन के दर्द को कैसे हम छुपाये ,
रोते हुए कैसे हम मुस्कुराये ,
आँखों के आंसू अब थमते नही है ,
जीने क अब बहाने नही है ,
हे खुदा !तू सुनता है सबकी ,मेरी क्यों सुनता नही है
मरने से डरते है,पर अब जिया भी ना जाये
किससे कहे ,कैसे कहे ,अपनों को और कितना रुलाये,
राम जी से नही है तुलना मेरी , फिर भी उनका बनवास केवल १४ वर्ष का था ,
मेरे बनवास का कब अंत होगा
हे खुदा ! करदे मेरे दर्द के सफ़र का अंत ,
अब और न सहा जाये ,अब और न सहा जाये